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सबसे अच्छे दोस्त की शादी में
बारात में सबसे ज़्यादा मैं नाचा — और पहली बार किसी से छुपाया नहीं कि मैं कौन हूँ।
मुसाफ़िर
1 min readUpdated
रोहन और मैं आठवीं क्लास से साथ हैं। उसी ने सबसे पहले जाना था कि मैं गे हूँ — कॉलेज के पहले साल में, एक ढाबे पर, आधी रात को। उसने बस इतना कहा था, "ठीक है। अब मेरी मैगी भी तू ही बनाएगा?"
पिछले महीने उसकी शादी थी। मैं डरा हुआ था — पूरा मोहल्ला, रिश्तेदार, वो आंटियाँ जो हर शादी में पूछती हैं, "अब तुम्हारा नंबर कब?"
हल्दी वाले दिन एक चाचाजी ने मज़ाक में वही सवाल पूछ लिया। मैं कुछ कहता, उससे पहले रोहन ने मेरे कंधे पर हाथ रखकर कहा, "चाचाजी, इसका नंबर तब आएगा जब इसे कोई अच्छा लड़का मिलेगा। तब तक आप मेरी शादी पर ध्यान दीजिए।"
कुछ सेकंड सन्नाटा रहा। फिर मौसी हँस पड़ीं, और बात आगे बढ़ गई। उस रात बारात में सबसे ज़्यादा मैं नाचा।
हर किसी के पास रोहन जैसा दोस्त नहीं होता, ये मैं जानता हूँ। पर अगर तुम्हारे पास है, तो उसे आज ही बता देना कि वो तुम्हारे लिए क्या मायने रखता है। मैंने विदाई के वक़्त बताया था — और हम दोनों रो पड़े थे।
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मुसाफ़िर
छोटे शहर से, बड़े सपनों के साथ। वो कहानियाँ लिखता हूँ जो सत्रह की उम्र में पढ़नी थीं।
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66 commentsमुसाफ़िरWriter
आप सबका दिल से शुक्रिया। आपके शब्दों ने मेरा दिन बना दिया।
Chandni Raat
Har line mein itni sachchai hai. Bahut dino baad kuch itna achha padha.
Reader 597403
परिवार का साथ सबसे बड़ी ताक़त होती है। बहुत प्यारी कहानी।
Reader 718831
हर पंक्ति में सच्चाई है। इसे लिखने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया।
Reader 549094
आपके शब्दों में बहुत अपनापन है। दिल से शुक्रिया।
Reader 135659
मैं भी एक छोटे शहर से हूँ। ये पढ़कर लगा कि मैं अकेला नहीं हूँ।