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अब्बू का ख़त
अब्बू ने कभी मुझसे इस बारे में बात नहीं की। फिर एक दिन उनकी अलमारी से एक ख़त मिला।
Gulmohar
1 min readUpdated
अब्बू कम बोलने वाले इंसान थे। जब मैंने घर पर बताया था कि मैं शादी नहीं करूँगा, और क्यों नहीं करूँगा, तो अम्मी बहुत रोई थीं। अब्बू ने बस अख़बार मोड़ा और कमरे से बाहर चले गए। उसके बाद उन्होंने कभी इस बारे में कुछ नहीं कहा।
पिछली सर्दियों में अब्बू हमें छोड़कर चले गए। उनकी अलमारी साफ़ करते हुए मुझे एक लिफ़ाफ़ा मिला, जिस पर मेरा नाम लिखा था। तारीख़ उस दिन के ठीक एक हफ़्ते बाद की थी, जिस दिन मैंने सच बताया था।
ख़त में लिखा था: "मुझे नहीं पता कि तुम्हें क्या कहूँ। मैं ऐसी दुनिया में बड़ा हुआ जहाँ ये बातें होती ही नहीं थीं। पर मैं इतना जानता हूँ कि तुम सच्चे हो, और मेहनती हो, और तुमने कभी किसी का दिल नहीं दुखाया। अल्लाह तुम्हें वैसे ही बरक़त दे, जैसे तुम हो। मुझमें ये कहने की हिम्मत नहीं है, इसलिए लिख रहा हूँ।"
वो ख़त उन्होंने कभी दिया नहीं। शायद हिम्मत नहीं जुटा पाए। पर अब वो मेरे बटुए में रहता है।
अगर तुम्हारे घर में भी कोई चुप है, तो ज़रूरी नहीं कि वो चुप्पी नफ़रत की हो। कभी-कभी वो बस डर होता है — प्यार करने का एक अधूरा तरीक़ा।
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Gulmohar
Hyderabad ki purani galiyon se. Shayari, chai aur woh baatein jo ghar pe nahi keh paaya.
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22 commentsReader 549094
❤️❤️
Chai aur Chapters
परिवार का साथ सबसे बड़ी ताक़त होती है। बहुत प्यारी कहानी।