FamilyFaith & cultureहिन्दी
ईद पर पहली बार, हम दोनों
सेवइयों की ख़ुशबू, नए कपड़े, और वो पहली ईद जब मैंने उसे अपने घर बुलाया।
Gulmohar
1 min readUpdated
हमारे घर में ईद का मतलब है सुबह-सुबह नमाज़, अम्मी की शीर-ख़ुरमा, और शाम तक आने-जाने वाले मेहमान। हर साल मैं इस दिन को उतना ही प्यार करता था, जितना उससे डरता था — क्योंकि हर मेहमान पूछता था कि मेरी शादी कब होगी।
इस बार मैंने अम्मी से पूछा कि क्या मैं आरिफ़ को बुला सकता हूँ। आरिफ़ और मैं चार साल से साथ हैं। अम्मी ने कुछ देर सोचा, फिर बोलीं, "बुलाओ। पर टाइम पर आए, शीर-ख़ुरमा ठंडी हो जाती है।"
आरिफ़ नए कुर्ते में आया, हाथ में मिठाई का डिब्बा लिए, इतना घबराया हुआ कि दरवाज़े पर ही जूते उतारना भूल गया। अब्बू ने उसे गले लगाया और कहा, "ईद मुबारक, बेटा।"
दिन भर मेहमान आते रहे। कुछ ने पूछा कि ये कौन है। अम्मी ने हर बार कहा, "हमारे घर का है।"
शाम को जब सब चले गए, अम्मी ने आरिफ़ को ईदी दी — एक लिफ़ाफ़ा, ठीक उतनी ही रक़म का जितनी मुझे मिलती है। आरिफ़ ने वो लिफ़ाफ़ा आज तक नहीं खोला। कहता है, कुछ चीज़ें ख़र्च करने के लिए नहीं होतीं।
What this story has earned
for its writer
Likes
8 likes
Comments
3 comments
Shares
0 shares
Written by
Gulmohar
Hyderabad ki purani galiyon se. Shayari, chai aur woh baatein jo ghar pe nahi keh paaya.
More from Gulmohar
More stories
See allHave a story of your own?
Write it under a pen name, in Hindi, English or Hinglish. Readers' likes, comments and shares earn you money.
Comments
33 commentsमुसाफ़िर
आपकी लेखनी में जादू है। अगली कहानी का इंतज़ार रहेगा।
Reader 145446
पढ़ते-पढ़ते आँखें भर आईं। इतनी सच्ची कहानी के लिए शुक्रिया।
Neela Aasmaan
ये कहानी मैंने अपने दोस्त को भेजी है। उसे इसकी ज़रूरत थी।