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माँ ने कहा — तुम जैसे हो, वैसे ही ठीक हो
जिस बात को कहने में मुझे दस साल लगे, माँ ने उसे दस सेकंड में समझ लिया।
मुसाफ़िर
1 min readUpdated
रात के खाने के बाद पापा टीवी देख रहे थे और माँ रसोई में बर्तन समेट रही थीं। मैंने कई बार सोचा था कि ये बात कैसे कहूँगा। आईने के सामने प्रैक्टिस भी की थी। पर उस रात सब शब्द गायब हो गए।
मैं रसोई में गया और बस इतना कहा, "माँ, मुझे लड़कियाँ पसंद नहीं हैं।"
माँ के हाथ रुक गए। कुछ देर उन्होंने कुछ नहीं कहा। वो कुछ सेकंड मेरी ज़िंदगी के सबसे लंबे सेकंड थे। फिर उन्होंने नल बंद किया, अपने हाथ पोंछे और मेरे पास आकर मेरा चेहरा अपने दोनों हाथों में ले लिया।
"मुझे पता था," उन्होंने कहा। "मैं बस इंतज़ार कर रही थी कि तुम ख़ुद बताओ।"
पापा को समझने में वक़्त लगा। कई हफ़्ते घर में ख़ामोशी रही। कुछ बातें चुभीं भी, और मैं कई रात रोया। पर माँ हर रोज़ मेरी थाली में मेरी पसंद की सब्ज़ी रखती रहीं, जैसे कह रही हों कि कुछ नहीं बदला।
आज पापा मेरे दोस्तों के नाम याद रखते हैं और पूछते हैं कि मैं ख़ुश हूँ या नहीं। हर परिवार की कहानी ऐसी नहीं होती, मैं जानता हूँ। पर अगर तुम डर के साये में जी रहे हो, तो इतना जान लो — कहीं न कहीं, कोई तुम्हें वैसे ही अपनाने को तैयार है, जैसे तुम हो।
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मुसाफ़िर
छोटे शहर से, बड़े सपनों के साथ। वो कहानियाँ लिखता हूँ जो सत्रह की उम्र में पढ़नी थीं।
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55 commentsमुसाफ़िरWriter
आप सबका शुक्रिया। जो अभी कह नहीं पाए — जल्दबाज़ी मत करना, सही वक़्त ज़रूर आएगा।
Reader 386416
मेरे पापा को भी वक़्त लगा था। आज वो मेरे सबसे बड़े सपोर्टर हैं। उम्मीद मत छोड़ना।
Reader 135659
❤️❤️❤️
Reader 597403
Your mother is a gem. Thank you for writing this — I needed to read it today.
Reader 718831
यह पढ़कर आँखें भर आईं। मेरी माँ भी ऐसी ही हैं, बस मैं अभी तक कह नहीं पाया। शुक्रिया, हिम्मत देने के लिए।